फिल्म रिव्यू: ‘हमार नाम बा कन्हैया’ – ट्रेलर में बवाल, फिल्म में धमाल!
पहला सीन: बैंक डकैती, गोलियों की तड़तड़ाहट, ऊपर से पुलिस सायरन…और अगले ही पल निरहुआ ऊँची आवाज़ में गरजते—“कन्हैया के नाम मत भूलिह, कहानी के मोड़ उहे बदलता।” बस यहीं से ट्रेलर ऐसा चढ़ता है कि ढ़ाई मिनट कब निकल गए, पता ही नहीं चलता।
कहानी की झलक—‘कन्हैया’ पर दोहरे इल्ज़ाम
ट्रेलर में साफ़ दिखता है कि शहर में हुई सबसे बड़ी बैंक लूट का ठीकरा एक सीधे-सादे गार्ड (निरहुआ उर्फ़ कन्हैया) के सिर फूट पड़ता है। पुलिस पूछताछ, मीडिया ट्रायल और समाज का ताना—सब कुछ उस भोले आदमी पर टूट पड़ता है। लेकिन क्लिप-क्लिप में मिलती फुर्तीली झलकियाँ बताती हैं कि मामला सिर्फ़ “सच-झूठ” का नहीं, इंसाफ़ और साज़िश का भी है।
सरप्राइज़ टर्न: कट-टू-कट फ़्लैशबैक में दिखता है कि कन्हैया पर न केवल लूट का, बल्कि किसी गहरे राजनीतिक षड्यंत्र का भी दाग है।
मसाला पैकेज: इमोशनल मोनोल़ॉग, “यूपी पुलिस” वाला चुटीला डायलॉग और “भूतिया खाए वाला…मस्त रह कहे वाला” जैसे चुलबुले पंच—भोजपुरीपन से लबरेज़।
टेक्निकल पंच—क्यों अलग है यह ट्रेलर?
| फ़ैक्टर | जोड़ा गया तड़का | असर |
|---|---|---|
| कैमरा (DOP: इमरान शगुन) | हैंड-हेल्ड शॉट्स व रोलिंग क्रेन से चेज़ सीक्वेंस | एक्शन रॉ और ग्रिपिंग |
| एडिट (तेज़) | हाइपर-कट ट्रांज़िशन और री-प्ले फ्लैश | थ्रिल का टेम्पो हाई |
| बैकग्राउंड स्कोर (पवन मुरादपुरी) | ढोल-नगाड़ा के साथ रॉ बेस | इमोशन और सस्पेंस दोनों चढ़ा देता |
| कलर टोन (डीआई: सेखर) | सिटी सीक्वेंस में नीयन-ब्लू, गाँव में मिट्टी वाला ऑरेंज | ‘दो दुनियां’ का बेहतरीन कॉन्ट्रास्ट |
म्यूज़िक—लोक-स्वर में मॉडर्न बीट
डॉ. सागर के बोल जैसे “मनवा के मंदिर में कन्हैया बसल बा” रेट्रो तबले से शुरू होते हैं और अचानक EDM हुक में बदल जाते हैं। साजन मिश्रा-पवन मुरादपुरी की जोड़ी ने पारंपरिक जोगीरा और अवधी फोक को क्लब-बीट पर मिला दिया—ट्रेलर के दो गाने “करनी धरनी सब तहरे नाम” और “घूंघट में बिजली” कान में चिपक जाते हैं।
स्टारकास्ट—‘निरहुआ इज बैक’, विलेन से लेकर कॉमेडी तक फूल पैकेज
संजय पांडेय: सूट-बूट वाला चालाक अफ़सर; आँखों की लालिमा देखकर ही डर लगे।
अमृता पाल: गाँव की जुझारू बहू, जो कोर्टरूम से लेकर पुलिस स्टेशन तक चीख-पुकार मचा देती है।
बाक़ी कास्ट—समर कत्यन, अयाज़ ख़ान, रक्खी जैसवाल—एक-एक फ्रेम में अपनी छाप छोड़ जाते हैं।
संवाद—मसालेदार भोजपुरी तड़का
“जाँच करबs त सच मिल जाई, बाकिर बहुते लोगन के परदा फट जाई!”—शशि रंजन द्विवेदी का ये डायलॉग ट्रेलर का नाबी है। पुलिसिया ह्यूमर (“यूपी पुलिस सदैव सेवार्थ बा”) और गाँव की तंज़-भरी बोली दोनों का बेस्ट ब्लेंड मिलता है।
निर्देशन—विशाल वर्मा का संतुलित स्टाइल
विशाल वर्मा ने हल्के-फुल्के पंच, सीरियस थ्रिल और टिपिकल भोजपुरिया इमोशन का बज़रंग-बली मिश्रण परोसा है। बैंक लूट की रेक्की, भागते वैन पर फाइट सीन और मंदिर के घंटे की बैकग्राउंड इमोशन—तीन अलग ज़ोन एक ही ट्रेलर में टकराए, फिर भी नारियल-सा जुड़कर फुटे नहीं।
क्यों देखें यह फ़िल्म?
निरहुआ का ‘ड्यूल इमेज’—मासूम-टू-मास्टरमाइंड, एकदम नयका अंदाज़।
रॉ एक्शन—लट्ठ, ट्रक-स्टंट, और हाथ में कुदाल…देसी अड्रेनलाइन।
गीत-संगीत—देसी धुन + माडर्न ग्रूव = डीजे पर भी बजेगा, शादी में भी।
समझदारी भरा सस्पेंस—कहानी में व्हिसल-वर्थी ‘आउट-ऑफ़-द-बॉक्स’ ट्विस्ट झलकता है।
अंतिम फ़ैसला
ट्रेलर देखकर लगता है ‘हमार नाम बा कन्हैया’ सिर्फ़ एक्शन-ड्रामा नहीं, मान-सम्मान बनाम साजिश की जद्दोजहद है। टेक्निकल चमक, गजब के डायलॉग, और निरहुआ का दमदार कमबैक—तीनों मिलकर यह भरोसा देते हैं कि फ़िल्म सिनेमाघर में दर्शकों का पैसा पूरा वसूल करेगी।
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