भोजपुरी संगीत की सुरीली रानी: सिंगर देवी
भोजपुरी संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज और अनोखे अंदाज से पहचान बनाने वाली गायिका देवी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनके गीतों में बिहार की मिट्टी की खुशबू और भोजपुरी संस्कृति की झलक साफ दिखती है। इस जीवनी में हम उनके जीवन के हर पहलू को आपके सामने लाने की कोशिश करेंगे—उनके जन्म से लेकर आज तक का पूरा सफर, उनके संघर्ष, उनकी सफलताएँ, उनका व्यक्तिगत जीवन, और यहाँ तक कि विवाद भी।
प्रारंभिक जीवन: छपरा की गलियों से शुरू हुआ सफर
देवी का जन्म बिहार के छपरा जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम देवी सिंह है। छपरा, जो गंगा नदी के किनारे बसा एक छोटा-सा शहर है, वहाँ उनका बचपन बीता। उनके परिवार में संगीत का माहौल था, और यही वजह थी कि देवी को बचपन से ही गाने का शौक लग गया। छोटी उम्र में ही वे घर पर होने वाली पूजा-पाठ में भजन गाया करती थीं, और स्कूल के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती थीं। उनके माता-पिता ने उनके इस शौक को देखा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया।
देवी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई छपरा में ही पूरी की। बाद में, उन्होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल की। हालाँकि, पढ़ाई के साथ-साथ उनका मन हमेशा संगीत में ही रमा रहता था। उस समय भोजपुरी संगीत को ज्यादा सम्मान नहीं मिलता था, और इसे एक छोटे स्तर का क्षेत्र माना जाता था। लेकिन देवी के सपने बड़े थे—वे इसे बदलना चाहती थीं।
देवी के परिवार की जानकारी
भोजपुरी गायिका देवी का परिवार शिक्षा और संस्कृति का एक खूबसूरत संगम है। उनके पिता, डॉ. प्रमोद कुमार जयप्रकाश, एक प्रोफेसर हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव से देवी को हमेशा प्रेरित किया। उनकी माँ, सावित्री वर्मा, भी एक प्रोफेसर हैं, जिन्होंने घर में सकारात्मक और सृजनात्मक माहौल बनाए रखा। देवी के भाई राज और दो बहनें बड़ी बहन नेहा और छोटी बहन नीति भी उनके परिवार का हिस्सा हैं। इस परिवार ने देवी को न केवल शिक्षा का महत्व सिखाया, बल्कि संगीत और कला के प्रति उनके प्रेम को भी पोषित किया, जो उनकी सफलता का मजबूत आधार बना।
संगीत की दुनिया में पहला कदम: संघर्षों से भरा दौर
संगीत में करियर बनाने का सपना लेकर देवी ने साल 2002 में अपनी यात्रा शुरू की। वे कई संगीत कंपनियों के पास गईं, अपने गाने रिकॉर्ड करवाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में उन्हें बार-बार rejection का सामना करना पड़ा। कई लोग उनकी आवाज को पसंद करते थे, लेकिन भोजपुरी संगीत में उस समय नए चेहरों को मौका देना आसान नहीं था। इन मुश्किलों के बावजूद, देवी ने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और लगन रंग लाई, जब साल 2003 में उनका पहला एल्बम "पुरवा बयार" रिलीज हुआ।
"पुरवा बयार" ने भोजपुरी संगीत की दुनिया में एक नई हवा चलाई। इस एल्बम के गाने लोगों को इतने पसंद आए कि देवी की आवाज हर घर में गूंजने लगी। यह उनकी पहली बड़ी सफलता थी, जिसने उनके लिए आगे का रास्ता खोल दिया।
सफलता की सीढ़ियाँ: "बावरिया" और उससे आगे
"पुरवा बयार" की सफलता के बाद, देवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसी साल 2003 में, चंदा कैसेट्स ने उनका दूसरा एल्बम "बावरिया" रिलीज किया। इस एल्बम में 8 गाने थे, और हर गाना एक से बढ़कर एक था। "बावरिया" ने बिहार और उत्तर प्रदेश में तहलका मचा दिया। लोग उनके गीतों को सुनकर झूम उठते थे, और उनकी लोकप्रियता आसमान छूने लगी। इस एल्बम ने उन्हें भोजपुरी संगीत की सुपरस्टार बना दिया।
देवी की खासियत यह थी कि वे सिर्फ एक तरह के गीतों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने भोजपुरी लोकगीत, देवी गीत, विवाह गीत, और छठ पूजा के गीत गाए। उनकी आवाज में एक ऐसा जादू था कि हर गीत को सुनने वाला खुद को उसमें खो देता था। इसके अलावा, उन्होंने भोजपुरी के साथ-साथ हिंदी, मैथिली, और मगही भाषाओं में भी गाया, जिसने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को सबके सामने ला दिया।
लोकप्रिय गीत: भोजपुरी संगीत की शान
देवी के कुछ गीत ऐसे हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके सबसे मशहूर भोजपुरी गीतों में शामिल हैं:
"कुवे का ठंडा पानी": एक मजेदार और चटपटा गीत, जो गाँव की जिंदगी को दर्शाता है।
"परवल बेचेह जइबे भागलपुर": यह गाना उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा उदाहरण है।
"ओ गोरी चोरी चोरी": एक रोमांटिक गीत, जो युवाओं के बीच खूब पसंद किया गया।
"परदेसिया-परदेसिया": इस गीत में प्रेम और वियोग का दर्द साफ झलकता है।
"अंगुरी में दस ले बिया नागिनिया": यह गाना उनके बोल्ड अंदाज को दिखाता है।
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इन गीतों ने न केवल भोजपुरी संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया, बल्कि देवी को "भोजपुरी की लता मंगेशकर" का खिताब भी दिलाया। उनके प्रशंसक उनकी तुलना महान गायिका लता मंगेशकर से करते हैं, जो उनकी प्रतिभा का सबसे बड़ा सम्मान है।
बॉलीवुड में एंट्री: एक नया अध्याय
देवी ने भोजपुरी संगीत के साथ-साथ बॉलीवुड में भी अपनी छाप छोड़ी। साल 2011 में, उन्होंने अक्षय कुमार की फिल्म "थैंक यू" में "रजिया गुंडों में फंस गई" गाना गाया। यह गाना हिट हुआ और बॉलीवुड में उनकी एंट्री का दरवाजा खोल दिया। इस गीत में उनकी चुलबुली आवाज ने सबका दिल जीत लिया।
इसके बाद, साल 2013 में उन्होंने भोजपुरी फिल्म "जलसाघर की देवी" में न सिर्फ गाया, बल्कि अभिनय भी किया और इसे प्रोड्यूस भी किया। इस फिल्म में उनके अभिनय को भी खूब सराहा गया। यह उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव था।
अंतरराष्ट्रीय मंच: भोजपुरी को दुनिया तक पहुँचाया
देवी ने भोजपुरी संगीत को भारत के बाहर भी पहचान दिलाई। उन्होंने कई देशों में स्टेज शो किए, जिनमें मॉस्को, बैंकॉक, भूटान, मॉरीशस, कतर, और दुबई शामिल हैं। इन शोज में उनकी परफॉर्मेंस को देखकर विदेशी दर्शक भी उनकी आवाज के कायल हो गए। यह उनके लिए गर्व की बात थी कि वे भोजपुरी संस्कृति को वैश्विक मंच पर ले गईं।
टीवी और अन्य योगदान: मल्टी-टैलेंटेड देवी
देवी ने संगीत के अलावा टेलीविजन की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने बिग गंगा और महुआ भोजपुरी जैसे चैनलों पर शो होस्ट किए। इन शोज में उनकी बोलचाल और हाजिरजवाबी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा, उन्होंने 50 से ज्यादा एल्बम में अपनी आवाज दी,
"देवी म्यूजिक आश्रम": संस्कृति को संजोने की कोशिश
देवी का योगदान सिर्फ गायन तक सीमित नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड के ऋषिकेश में "देवी म्यूजिक आश्रम" की स्थापना की। यह एक ऐसा संस्थान है, जहाँ भारतीय शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, योग, और ध्यान सिखाया जाता है। इस आश्रम के जरिए वे नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना चाहती हैं। यह उनका समाज के प्रति एक बड़ा योगदान है।
व्यक्तिगत जीवन: प्यार और विचार
देवी का निजी जीवन भी हमेशा चर्चा में रहा है। साल 2019 में, उन्होंने खुलासा किया कि वे ब्राजील के एक शख्स, फैब्रिसियो, के साथ रिलेशनशिप में हैं। इस खबर ने उनके फैंस को चौंका दिया। देवी ने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बात की और कहा कि वे शादी से ज्यादा साथी होने में विश्वास रखती हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें वेस्टर्न कल्चर पसंद है, जहाँ लोग एक-दूसरे को समझने और जानने के बाद ही रिश्ते को आगे बढ़ाते हैं।
उन्होंने शादी और समाज के बारे में भी अपने विचार रखे। उनका कहना था कि आज भी समाज में बेटियों को ससुराल को ही अपना घर मानने की सीख दी जाती है, जो गलत है। वे दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ भी बोलती रही हैं।
विवाद: "रघुपति राघव" पर हंगामा
देवी का नाम विवादों से भी जुड़ा। साल 2024 में, पटना में भाजपा के एक कार्यक्रम में उन्होंने महात्मा गांधी का भजन "रघुपति राघव राजा राम" गाया। जब वे "ईश्वर अल्लाह तेरो नाम" की पंक्ति पर पहुँचीं, तो कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। माहौल इतना बिगड़ गया कि उन्हें गाना रोकना पड़ा और माफी माँगनी पड़ी। यह घटना करीब 10 मिनट तक चली, और मंच पर मौजूद लोग इसे शांत करने की कोशिश करते रहे।
इस घटना के बाद, देवी ने कहा कि वे इस बात से हैरान और दुखी हैं। उनका मानना था कि बड़े नेताओं को सामने आकर यह कहना चाहिए था कि इस गीत में कुछ भी गलत नहीं है। इस विवाद ने देश में धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता पर एक नई बहस छेड़ दी।
उपलब्धियाँ: भोजपुरी की शान
देवी ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए। कुछ मुख्य उपलब्धियाँ:
50 से ज्यादा एल्बम: उनकी आवाज ने दर्जनों एल्बम को हिट बनाया।
अंतरराष्ट्रीय स्टेज शो: मॉस्को से दुबई तक, उन्होंने भोजपुरी को ग्लोबल पहचान दी।
टीवी शो: बिग गंगा और महुआ भोजपुरी पर उनकी होस्टिंग को खूब पसंद किया गया।
फिल्मों में योगदान: "थैंक यू" और "जलसाघर की देवी" में उनकी प्रतिभा सामने आई।
उन्हें भोजपुरी लोक गायकों जैसे महेंद्र मिश्रा और भिखारी ठाकुर के साथ परफॉर्म करने का मौका भी मिला। उनके फैंस उन्हें "भोजपुरी की लता मंगेशकर" कहते हैं
निष्कर्ष: एक प्रेरणादायक शख्सियत
देवी का जीवन एक ऐसी कहानी है, जो संघर्ष से शुरू होकर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँची। उन्होंने भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी, इसे बिहार से निकालकर देश और दुनिया तक पहुँचाया। उनकी आवाज में एक जादू है, जो हर दिल को छू जाता है। वे न सिर्फ एक गायिका हैं, बल्कि एक प्रेरणा भी हैं—उन लोगों के लिए जो अपने सपनों को सच करना चाहते हैं।
उनका सफर हमें सिखाता है कि मेहनत और लगन से कोई भी मुश्किल राह आसान हो सकती है। आज देवी भोजपुरी संगीत की शान हैं, और उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
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